इस लेख में यह बताया गया है कि गीत गतिरूप की वर्णिक छंद की सुविधा का प्रयोग कैसे करें। वर्ण और गण क्या होते हैं जानकारी के लिए यह लेख देखें।
गीत गतिरूप में वर्णिक छंद के अनुसार से प्रतिरूप पाने के लिए "वर्णिक-कविता" चुनें।
अब आपकी कविता का विश्लेषण वर्ण और गण के अनुसार होगा, और उसके अनुसार प्रतिरूप बनेगा।
उदाहरण स्वरूप यह चार पंक्तियाँ देखें --
कर्मों पे अधिकार है
नहीं फलों पे तेरा है
फल हेतु कर्म न हो
अकर्मण्य भी तू न हो
यह पंकतियाँ अनुष्टुप छंद में हैं, जहाँ हर पंक्ति में कुल आठ वर्ण हैं। कौन से गण और वर्ण हों, यह महत्वपूर्ण नहीं है।

इसी छंद में भगवत्गीता के अधिकांश श्लोक लिखे गए हैं। जैसे कि
कर्मण्येवाधिकारस्ते
मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भू:
मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि ॥भ.गी.2:47॥

यदि आप ऐसे वर्णिक छंद में लिखना चाहते हैं जहाँ पंक्ति में हर गण और गुरु-लघु वर्ण की जगह निर्धारित हो तो उसका प्रतिरूप भी सम्भव है। जैसे कि --
वृहत रचना, चेतें तो जी, खिले बहुधा उड़े
थिरक थिरके, गाते जाए, सभी मधु सा लगे
हर पंक्ति में कुल 17 वर्ण हैं। पंक्तियों में क्रमश: एक नगण (१११), एक सगण (११२), एक मगण (२२२), एक तगण (२१२), फिर एक सगण (११२) और अन्त में एक लघु और एक गुरु वर्ण हैं।
यगण, मगण इत्यादि, गीत गतिरूप के प्रतिरूप में इन रंगों में दर्शाए गए है --
वर्ण गुरु वर्ण है कि लघु वर्ण है, वह वर्ण के बॉक्स के बॉर्डर से दर्शाया जाता है। गुरु वर्ण के लिए मोटा बॉर्डर और लघु के लिए सामान्य। जैसे "रचना" एक सगण है, जिसमें र और च लघु वर्ण हैं और ना गुरु वर्ण है --

छंद की मापनी भी दी जा सकती है --

जैसे यह पंक्तियाँ "हरिणी" छंद पर हैं। जिसकी मापनी है १११११२ २२२२ १२११२१२। मापनी देने पर आपकी पंक्तियों में यति सही स्थान पर है कि नहीं, यह भी प्रतिरूप में खाली सफेद रेखा से दिखता है। गण और वर्ण की संचरना निर्धारित छंद के अनुकूल है कि नहीं, वह तो दिखता ही है।
उच्चारण अनुसार किसी वर्ण को परिवर्तित करने की सुविधा जैसे अन्य सभी प्रकार की कविताओं में है, वर्णिक-कविता में भी है।
गीत गतिरूप में वर्णिक छंद की सुविधा बनाने में इन सूत्रों से मुझे बहुत मदद मिली --
* धीरेन्द्र त्रिपाठी के सुझाव
* कालपाठी की कविताएँ और उनके नीचे छंद की जानकारी
* परमेश्वरानन्द शर्मा शास्त्री की "छन्द:शिक्षा" नामक पुस्तक (1946 संस्करण)
* इन्टरनेट पर हिन्दी छंद की कुछ जानकारीयाँ
और
* Elm Programming Language
इन सभी संसाधनों और व्यक्तियों को बहुत आभार।