मैं (वाणी मुरारका) जितना सा समझी हूँ कि वर्णिक छंद, वर्ण, गण क्या होते है, वह यहाँ साझा कर रही हूँ। कोई ग़लतियाँ या प्रश्न हों तो बताइएगा।
गीत गतिरूप में वर्णिक कविता की सुविधा की जानकारी यहाँ उपलब्ध है।
संक्षिप्त में
वर्ण अंग्रेंजी के syllable के समान होते हैं। जैसे मात्राओं के अनुसार "कर्म" के तीन अक्षर हैं -- क, र्, और म

किन्तु वर्णों के अनुसार "कर्म" में दो वर्ण हैं -- कर् और म
लघु मात्रा का एक अक्षर लघु वर्ण होता है, दीर्घ मात्रा का अक्षर गुरु वर्ण होता है। आधे मात्रा की एक बारीकी पर लेख के अन्त में चर्चा करेंगे।
याद रखने के सहूलियत के लिए तीन-तीन वर्ण की संरचना को गण कहा गया। तो तीन-तीन लघु या गुरु वर्ण की यह आठ संरचनाएँ सम्भव हैं, जहाँ हम लघु को 1 कह रहें हैं, और गुरु को 2 --
| वर्ण संरचना | गण का नाम | याद रखने के लिए | कुल मात्रा | कुल वर्ण | |
| 1. | 122 | यगण | यमाता | 5 | 3 |
| 2. | 222 | मगण | मातारा | 6 | 3 |
| 3. | 221 | तगण | ताराज | 5 | 3 |
| 4. | 212 | रगण | राजभा | 5 | 3 |
| 5. | 121 | जगण | जभान | 4 | 3 |
| 6. | 211 | भगण | भानस | 4 | 3 |
| 7. | 111 | नगण | नसल | 3 | 3 |
| 8. | 112 | सगण | सलगा | 4 | 3 |
इन गण के नाम और प्रकार को याद रखने के लिए सूत्र है "यमाताराजभानसलगा"। यह गण, गीत गतिरूप में इन रंगों में दर्शाए गए हैं।
आधा अक्षर और वर्ण
आधा अक्षर यदि एक मात्रा ले रहा है, और वह एक लघु मात्रा के अक्षर के बाद आता है, तो वह दोनों अक्षर मिलकर एक गुरु वर्ण माना जाता है। उदाहरण स्वरूप -
"कर्म" = क + र् + म = गुरु वर्ण ( क + र् ) + लघु वर्ण ( म )
और गण में
"कर्मठ" = भगण 211 , जैसे कि "साधन"