मापनी (निर्धारित छंद में लिखना)

छंद में लिखने की पहली पायदान है कि पंक्तियों की कुल मात्रा संतुलित हो, पर पंक्ति के बीच में भी लघु दीर्घ स्वरों की संरचना से छंद का सौन्दर्य और गहराता है — खासकर पंक्ति के प्रारम्भ और अन्त में।

निर्धारित संरचना की मापनी देकर आप उसके अनुसार लिख सकते हैं। गीत गतिरूप आपको दिखाएगा कि आपकी पंक्ति मापनी के अनुकूल है कि उससे भटक रही है।

इसके लिए कविता की पहली पंक्ति में छंद की मापनी लिखें। जैसे मंदाक्रांता छंद की मापनी है —
2222 111112 2122122

अर्थात पंक्ति में मात्राओं की संरचना ऐसी होनी चाहिए। दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ अल्पविराम (यति) लघु-लघु-लघु… इत्यादि। मापनी में यति की जगह space दें।

कविता के बॉक्स में पहले मापनी लिखें फिर अपनी कविता की पंक्तियाँ और प्रतिरूप देखें। जैसे यहाँ धीरेन्द्र त्रिपाठी “कालपाठी” की कविता “एक लघु जीव से…” की दो पंक्तियों का उदाहरण दिया है —
तेरी मेरी विविध विधि है जीव संतोष की रे
दोनों तो हैं सुविकसित है दौड़ता कौन धीरे

प्रतिरूप ऐसे दिखेगा —

जिसमें दीर्घ लघु विराम की संरचना का दिए गए मापनी के संग मेल स्पष्ट दिख रहा है।

कविता की पंक्ति यदि मापनी के अनुकूल नहीं है तो वह भी प्रतिरूप में स्पष्ट हो जाता है। जैसे
2222 111112 2122122
आने जाने में लगता है समय बहुत ही रे

मापनी को आप हिन्दी के अंकों में भी लिख सकते हैं जैसे २२२२ १११११२ २१२२१२२

अनामी छंद भी

इस प्रकार, आप किसी भी छंद की मापनी दे सकते हैं। नामी छंद, या अनामी। कई बार कविता लिखते वक्त प्रारम्भिक पंक्तियाँ लय में होती हैं फिर आगे बढ़ते बढ़ते लय छूटता सा है। तो आप अपनी पंक्ति से ही मापनी बनाकर पहली पंक्ति में लिख सकते हैं।

जैसे विनोद तिवारी की कविता “प्यार का नाता” लें। यह किसी नामी छंद पर नहीं है (जहाँ तक हमें पता है)।
ज़िन्दगी के मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा।
राह की वीरानियों को मिल गया आखिर सहारा।
मैं तुम्ही को खोजता हूँ, चाँद की परछाइयों में।
बाट तकता हूँ तुम्हारी, रात की तनहाइयों में।
आज मेरी कामनाओं ने तुम्हे कितना पुकारा।

इसकी अपनी मापनी है जिसका हम प्रतिरूप देखर अनुमान लगा सकते हैं

प्रतिरूप और कविता की पंक्तियों को देखें तो स्पष्ट है कि इसकी मापनी है
21222122 21222122

यह मापनी देकर कविता की पंक्तियाँ देंखें —

साँस कहाँ लें?

रात को तो हम कभी न कभी सो ही जाते हैं नींद आने से*, पर दिन भर में भी थोड़ा ठहरने की, साँस लेने की आवश्यकता होती है।

वैसे ही निर्धारित छंद में मात्राओं का आकार तो निर्धारित होता ही है, साथ ही पंक्ति के बीच में अल्पविराम कहाँ हो, “यति” भी निर्धारित होता है। जैसे मंदाक्रांता छंद की मापनी 2222 111112 2122122 में दो स्थान पर यति अनिवार्य है — 2222 के बाद, और 111112 के बाद।

अब आपकी पंक्तियों में मापनी के अनुकूल यति होने पर गीत गतिरूप उसे मोटे नीले धारी में दिखाएगा। जैसे कविता के बॉक्स में यह लिखने से
2222 111112 2122122
तेरी मेरी विविध विधि है जीव संतोष की रे
दोनों तो हैं सुविकसित है दौड़ता कौन धीरे **

उसका प्रतिरूप ऐसा दिखेगा

* “सो ही जाऊँगा नींद आने से” ~ विनोद तिवारी की ग़ज़ल से

** कालपाठी की कविता “एक लघु जीव से…” से उद्धृत

इस सुविधा — मापनी और यति — के विषय में कोई भी प्रश्न, सुझाव, टिप्पणी हो तो अवश्य लिखें।

नाप कर माप कर! (मापनी)

कई दिनों से (बल्कि सालों से) मन में यह बात थी कि गीत गतिरूप में यह सुविधा होनी चाहिए| छंद की मापनी देकर उसके अनुसार कविता का प्रतिरूप पाने की सुविधा। एक बार मैंने कोशिश भी की, पर कोड करना जटिल लगा। मैंने छोड़ दिया।

हाल में कवि और गीत गतिरूप के प्रयोगी ( यूज़र), धीरेन्द्र त्रिपाठी ने कुछ सुझाव दिए जिससे कि यह महत्वपूर्ण सुविधा कोड करना काफ़ी सरल हो गया, और अब यह आपके लिए तैयार है।

काव्यशास्त्र और संगीत में सक्रिय रुचि रखने वाले धीरेन्द्र त्रिपाठी “कालपाठी” के नाम से लिखते हैं। विभिन्न छंदों की उनकी कविताएँ, यहाँ, उनके वेबसाइट पर, छंद की जानकारी सहित संकलित है। साथ ही व्यवसाय से वह प्रौद्योगिकी के सलाहकार भी हैं, तो उनकी ओर से यह सुझाव आए, आश्चर्य नहीं। इसके लिए उन्हें बहुत धन्यवाद।

कालपाठी की ही कविता “एक लघु जीव से…” की दो पंक्तियों के माध्यम से मापनी की यह सुविधा को जानें —

कविता के टेक्स्ट के पहले, प्रथम पंकित में अब आप छंद की मापनी लिख सकते हैं,
जैसे कि मंदाक्रांता छंद की मापनी
2222 111112 2122122
और उसके बाद कविता की पंक्तियाँ, जैसे कि
तेरी मेरी विविध विधि है जीव संतोष की रे
दोनों तो हैं सुविकसित है दौड़ता कौन धीरे

(कालपाठी)


और प्रतिरूप देखें तो यह पाएँगे —


यदि पंक्तियाँ मापनी के अनुकूल नहीं हैं तो प्रतिरूप में दिख जाएगा, जैसे कि —
2222 111112 2122122
आने जाने में लगता है समय बहुत ही रे


इस उदाहरण में कुल मात्रा एक से कम पड़ रहा है (27 की जगह 26) वह तो दिख ही रहा है, साथ ही रंगों के कारण छंद से पृथक पहली त्रुटि कहाँ है, और आगे के बेमेल भी स्पष्ट हो रहे हैं।


मापनी आप हिन्दी के १ २ में भी दे सकते हैं —
२२२२ १११११२ २१२२१२२

मापनी यदि न भी दें तो अब दीर्घ मात्रा और दो लगातार लघु मात्रा हरे में दिखते हैं और अकेला लघु हो तो नीले में। इससे बिन मापनी के भी छंद का आकार ज्यादा स्पष्ट होता है। इसके कारण तुकान्त पंक्तियों के रंग देखना अब अतिरिक्त विकल्पों में डाल दिया गया है —


सॉफ़्टवेयर अभी यति (छंद में विराम कहाँ अनिवार्य है) नहीं दिखाता है। वह प्रबन्ध और उसकी घोषणा बाद में कभी।

इस सुविधा के विषय में कोई भी प्रश्न अथवा टिप्पणी हो तो नीचे अवश्य लिखें।

नये रूप में गीत गतिरूप 7.0

गीत गतिरूप अब एक नए प्रयोग-आवरण (user interface) में उपलब्ध है। आशा है कि यह नया आवरण आपको ज्यादा आसान और स्वच्छ लगेगा — खासकर मोबाइल में प्रयोग करने के लिए।

क्योंकि यह बदलाव महत्वपूर्ण है, इस संस्करण को गीत गतिरूप 7.0 कहा गया है।

शुरुआत में ही, प्रवेश (लॉगिन) व सदस्य बनने के लिंक स्पष्ट उपलब्ध हैं —

प्रवेश करने पर आपकी पिछली रचनाएँ सबसे पहले दिखती हैं। नई रचना के लिए नीचे (+) बटन दबाएँ —

शुरुआत में ही आप चुन सकते हैं कि आप क्या लिखना चाहते हैं — नई कविता / ग़ज़ल / या मुक्त-कविता, जिससे कि उस विधा के अनुरूप सुविधाएँ सक्रिय रहें —

यदि एक विधा ठीक नहीं बैठ रही है, और आप दूसरी विधा के अनुसार अपनी रचना को देखना चाहते हैं तो वह विधा चुन कर हमेशा परिवर्तन कर सकते हैं —

प्रतिरूप का चित्र डाउनलोड करने की सुविधा नीचे उपलब्ध हो जाती है, जब प्रतिरूप दिखने लगता है —

शब्द सम्पदा ऊपर हमेशा उपलब्ध है —

आशा है कि इस नए रूप में गीत गतिरूप का प्रयोग आपके लिए और सरल होगा।

एप्प का आवरण बदलने से एक बार असुविधा लगती है। यदि आपको गीत गतिरूप के प्रयोग में कोई भी असुविधा महसूस हो तो हमें ज़रूर लिखें

अब प्रतिरूप डाउनलोड कर सकते हैं

अब जब गीत गतिरूप में (प्रतिरूप बटन दबाने पर) आपकी कविता का प्रतिरूप बने, तो आप उसे चित्र के जैसे डाउनलोड कर सकते हैं।

इसके लिए “🎨👇” बटन दबाएँ —

आपका फ़ोन पूछेगा कि चित्र कहाँ और किस नाम से डाउनलोड करना है। दीए हुए विकल्प को आप बदल सकते हैं अथवा उसी को स्वीकार सकते हैं।
हो सकता है कि आपके फ़ोन में डाउनलोड अलग प्रकार से काम करे।
कम्प्यूटर / लैपटॉप पर भी आप “🎨👇 ” दबाकर चित्र डाउनलोड कर सकते हैं।

डाउनलोड किए हुए चित्र का आप किसी भी प्रकार प्रयोग कर सकते हैं — शेयर कर सकते हैं, या कुछ और।

क्या आपको यह सुविधा किसी मतलब की लगी? बताइयेगा।

इस पोस्ट में उदाहरण स्वरूप, केदारनाथ अग्रवाल की कविता “बसंती हवा” की कुछ पंक्तियों का प्रयोग किया गया है।

तुकांत पंक्तियाँ उभर रही हैं रंगों में

गीत गतिरूप में एक और वृद्धि — अब कविता में तुकांत पंक्तियों के तुक वाले अक्षर अलग रंग में उभर कर आएँगे

उदाहरण स्वरूप देखिए विख्यात कविता, केदारनाथ अग्रवाल की रचना “बसंती हवा” की कुछ पंक्तियाँ —

हवा हूँ, हवा मैं
बसंती हवा हूँ।

सुनो बात मेरी –
अनोखी हवा हूँ।
बड़ी बावली हूँ,
बड़ी मस्तमौला।
नहीं कुछ फिकर है,
बड़ी ही निडर हूँ।
जिधर चाहती हूँ,
उधर घूमती हूँ,
मुसाफिर अजब हूँ।

छन्द-मुक्त कविता में भी तुकांत पंक्तियाँ अलग से उभर कर आएँगी। छन्द-मुक्त कविता में भी लय और तुक की उपस्थिति से कविता और प्रभावकारी हो जाती है।

उदाहरण स्वरूप देखिए विनोद तिवारी की कविता “जीवन दीप” की कुछ पंक्तियाँ —

यह विशाल ब्रह्मांड
यहाँ मैं लघु हूँ
लेकिन हीन नहीं हूँ।
मैं पदार्थ हूँ
ऊर्जा का भौतिकीकरण हूँ।
नश्वर हूँ,
पर क्षीण नहीं हूँ।
मैं हूँ अपना अहम‌
शक्ति का अमिट स्रोत, जो
न्यूटन के सिद्धान्त सरीखा
परम सत्य है,
सुन्दर है, शिव है शाश्वत है।
मेरा यह विश्वास निरन्तर
मेरे मानस में पलता है।
मेरा एक दीप जलता है।

आशा है इस वृद्धि से आपको अपनी कविता का आकार सुगठित करने के लिए और प्रेरणा मिलेगी। गीत गतिरूप में आप अपनी कविता का प्रतिरूप तो देख ही सकते हैं, अन्य कुशल कवियों की कविता भी डाल कर प्रतिरूप देख सकते हैं। इससे हमारे सीखने समझने में बहुत वृद्धि होती है।

तो आपकी या किसी अन्य कवि की कविता पर इस नई सुविधा का असर देखने आईये गीत गतिरूप में। कुछ भी प्रश्न, सुझाव, अथवा टिप्पणी हो तो ज़रूर लिखें।

गीत गतिरूप का एप्प

अब आप गीत गतिरूप को एप्प जैसे अपने फ़ोन पर सेव कर सकते हैं। इस लिंक से गीत गतिरूप पर आइये — https://geet-gatiroop.com/ । पधारने पर, नीचे “Add Geet Gatiroop to Home screen” दिखेगा। उसपर क्लिक करेंगे तो गीत गतिरूप का आयकॉन आपके फोन पर आजाएगा।

कम्प्यूटर पर एप्प लगाने का तरीका नीचे चित्रों के बाद दिया है।

फोन / टैबलेट पर —

“Add Geet Gatiroop to Home screen” पर क्लिक करें
यह आयकॉन आपके फोन पर आ जाएगा।

“Add Geet Gatiroop to Home screen” यदि नहीं दिख रहा है तो यह आप अपने ब्राउज़र मेन्यू को ऊपर दाहिने कोने पर तीन डॉट “⋮” द्वारा भी पा सकते हैं:

लैपटॉप-डेस्कटॉप पर

अपने कम्प्यूटर पर गीत गतिरूप का एप्प लगाने के लिए Chrome द्वारा गीत गतिरूप पर आकर ब्राउज़र के एडरेस बार पर “+” चिन्ह को दबाएँ और एप्प इन्सटॉल हो जाएगा।

यदि + नहीं दिख रहा है तो वही ऊपर दाहिने कोने पर तीन डॉट “⋮” से ब्राउज़र मेन्यू दबाएँ और नीचे चित्र के अनुसार Shortcut बनाएँ —

बड़े को छोटा किया तो दिख जाएगा

कविता में उच्चारण से ही लय निर्धारित होता है। देवनागरी लिपि के लघु (छोटे) दीर्घ (बड़े) स्वरों (अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ) का ठीक उच्चारण हो तो कम और ज्यादा समय लगता है और इसे ही मात्रा कहते हैं — समय की मात्रा।

इसके अनुसार तुलसिदास, दिनकर, बच्चन जैसे दिग्गज कवियों और पहले के गीतकारों की रचनाओं को गीत गतिरूप में डालें तो कविता लय के अनुसार सटीक ही दिखती है। किन्तु भाषा सदा रूप बदलता रहता है, तो कई बार उच्चारण लिपि के अनुकूल नहीं होता। हम भी रचना को छंद में ढालने का पूरा प्रयत्न नहीं करते हैं।

तो इन कुछ कारणों से शब्दों में बड़ी मात्रा का छोटा उच्चारण होता है —

  1. यदि रचना उर्दू से प्रेरित हो तो उर्दू में लघु दीर्घ स्वर (vowel) की ज्यादा छूट है
  2. रचना में अंग्रेजी के शब्द हों तो अंग्रेजी का कई जगह सही उच्चारण लघु होता है, जबकि करीबी अक्षर हिन्दी में दीर्घ ही लिखना होता है
  3. या हम बस कहीं कोई शब्द छोटा ही कह देना चाहते हैं, हालांकि उसका सही उच्चारण दीर्घ है

ऐसे में आप गीत गतिरूप में दीर्घ स्वर को लघु में बदल सकते हैं, और जब ऐसा करते हैं तो वह पीले रंग में बदल जाता है जिससे कि स्पष्ट नज़र आए कि रचना में किस जगह उच्चारण, लिपि के सही उच्चारण से भिन्न है।

देखिए, तीनों स्थिति के उदाहरण

1. उर्दू से प्रेरित रचना — दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

गीत गतिरूप में यह पहले तो ऐसे दिखता है

यह ग़ज़ल 26 मात्रा के लय पर है। पढ़ कर अपने उच्चारण पर ध्यान दें तो पायेंगे कि कई जगह बड़े स्वर का छोटा उच्चारण हो रहा है। उन अक्षर पर क्लिक करें तो वह सिकुड़ जाएगा और पीले रंग में बदल जाएगा। ऐसा करने पर प्रतिरूप यह बनता है —

पढ़ने के वक्त क्या आपको भी लगा कि यह पीले अक्षरों का लघु उच्चारण हो रहा है? लय में लिखने के लिए ध्वनि और उच्चारण पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।

2. अंग्रेजी शब्द का प्रयोग – वाणी मुरारका की छोटी सी रचना

भाषा हूँ मैं खाली पैकेट
मुझमें जो भरना है भर दो
हिन्दी या अंग्रेज़ी संस्कृत
कटु या फिर कुछ सोच प्रखर दो

कटु जो है वह मिट जाएगा
भाषा चाहे कोई भी हो
उन्नत जो है वही बचेगा
पैकेट जिस भी भाषा का हो

पहले गीत गतिरूप यह दिखाता है

यहाँ अंग्रेजी शब्द “पैकेट” का प्रयोग हुआ है, जिसके सही उच्चारण में “के” छोटा ही कहा जाता है। तो पैकेट के “के” पर क्लिक कर हम उसे छोटा करें तो प्रतिरूप यूँ बदलता है

3. बॉलिवुड का प्रसिद्ध गाना “तुम ही हो” – अरिजीत सिंह गायक, गीतकार मिथुन

हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते
तेरे बिना क्या वजूद मेरा
तुझसे जुदा गर हो जाएँगे
तो खुद से भी हो जाएँगे जुदा

यहाँ गायन में कई बड़ी मात्राओं का छोटा उच्चारण किया गया है जिससे शब्द संगीत के लय में फिट हो जाए। तो आप गाना सुनें तो पायेंगे कि इन शब्दों के उच्चारण को यहाँ बदला गया है

कविता यदि अपने में लय और छंद के अनुकूल हो तो संगीत के बिना भी पाठक के दिल में उतरती है। हम यदि बार बार कविता को संशोधित कर छंद में लिखने का प्रयत्न करें तो अच्छा है, किन्तु यह कुछ उदाहरण थे कि यदि आप उच्चारण बदल रहे हैं तो गीत गतिरूप में उसे कैसे दर्शा सकते हैं।

खास मोबाइल के लिए

आप में से अधिकांश गीत गतिरूप का प्रयोग मोबाइल पर करते हैं, तो खास आपके लिए गीत गतिरूप में कुछ वृद्धि की गई है। संक्षिप्त विवरण पढ़, उपयोग कर बाताइयेगा कि इससे मोबाइल पर गीत गतिरूप और सुविधाजनक हुआ है कि नहीं —

पहले मोबाइल की सकड़ी स्क्रीन से प्रतिरूप अक्सर बाहर चला जाता था। पंक्ति कितने मात्राओं की है यह देखने दाहीने स्क्रोल करना पड़ता था।

अब, प्रतिरूप स्क्रीन की चौड़ाई के भीतर रहता है। जैसे कि बच्चन की इन पंक्तियों में —
कहते हैं तारे गाते हैं
सन्नाटा वसुधा पर छाया
नभ में हमने कान लगाया
फिर भी अगणित कंठों का यह
राग नहीं हम सुन पाते हैं!

कविता की पंक्तियाँ ज्यादा बहर की हो, और प्रतिरूप के डिब्बे बहुत छोटे नज़र आ रहे हों तो
* आप मोबाइल को घुमा सकते हैं जिससे प्रतिरूप नई चौड़ाई के अनुकूल चौड़ा हो जाए
या
* नई सुविधा “स्क्रीन फिट” पर क्लिक कर उसे ऑफ़ कर सकते हैं, जिससे कि प्रतिरूप अपने पूरे आकार में दिखे

जैसे धर्मवीर भारती की रचना कनुप्रिया की यह कुछ पंक्तियाँ
जिसकी शेषशय्या पर
तुम्हारे साथ युग-युगों तक क्रीड़ा की है
आज उस समुद्र को मैंने स्वप्न में देखा कनु

मोबाइल पर यह प्रतिरूप बहुत ही छोटा दिख रहा है

तो या तो हम मोबाइल को घुमा सकते हैं —

या नई सुविधा “स्क्रीन फिट” पर क्लिक कर उसे ऑफ़ कर सकते हैं

और पहले के जैसे दाहिनी ओर स्क्रोल कर सकते हैं

आशा है कि अब बार बार लगभग हर कविता के लिए आपको अब दाहिने स्क्रोल नहीं करना होगा और “स्क्रीन फ़िट” को तब ही ऑफ़ करना होगा जब कविता ऐसी मांग करे।

यह सुविधा किसी भी मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप, मॉनिटर पर काम आ सकती है, किन्तु खास मोबाइल के प्रयोगकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। शब्द सम्पदा (समानार्थक शब्द) के स्क्रीन को भी और परिष्कृत किया गया है जिससे कि वह कविता और प्रतिरूप के बीच न आए।

बताइयेगा इन बदलाव से गीत गतिरूप आपके लिए और उपयोगी हुआ क्या?

आकार रंग में परिवर्तन — सरल, स्पष्ट प्रतिरूप

आप अपनी कविता में निहित छंद और लय का विश्लेष्ण और सरलता पूर्वक कर सकें इसके लिए गीत गतिरूप अब और सरल प्रतिरूप बनाता है। इससे मात्राओं का संयोजन और स्पष्ट उभरता है।

उदाहरण स्वरूप, विनोद तिवारी कृत “प्यार का नाता” की कुछ पंक्तियाँ देखें —

ज़िन्दगी के मोड़ पर यह
प्यार का नाता हमारा।
राह की वीरानियों को
मिल गया आखिर सहारा।

प्रतिरूप में अक्षरों को छिपा दें और पंक्तियाँ सटाएँ, तो संयोजन और भी स्पष्ट हो जाता है।

जब कुल मात्राएँ बहर / छन्द के अनुकूल हो पर लय के अनुकूल पंक्तिओं में संयोजन और सुधारना चाहें, तो यह प्रतिरूप से त्रुटि की जगह देखने में और सुविधा होती है।

ग़ज़ल में रदीफ़ काफ़िया अभी भी देख सकते हैं। उदाहरण स्वरूप, ग़ालिब के कुछ शेर

कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नज़र नहीं आती

मौत का एक दिन मुऐयन है
नींद क्यों रात भर नहीं आती

कविता में स्वर, व्यंजन से ही तुक बनता है। स्वर, व्यंजन के संयोजन का अलंकार से गहरा रिश्ता है। इस सब से कविता के कुल सौन्दर्य पर प्रभाव पड़ता है। आगे हम कोशिश करेंगे कि स्वर, व्यंजन को पुन: प्रतिरूप में किसी तरह से दिखाएँ मगर फिर भी प्रतिरूप द्वारा विश्लेष्ण सरल ही रहे। इसके लिए कुछ शोध, अध्ययन, मनन की आवश्यकता होगी।

अभी तो आशा है कि इस बदलाव से आपके लिए अपनी कविता में निहित छंद और लय का विश्लेषण सरल होगा।